जीवन जीने की कला जानिए खुशहाल जीवन का सहज उपाय
नमस्कार दोस्तों,
आज हम बात करेंगे जीवन जीने की कला के बारे में, जो हमें एक खुशहाल और सफल जीवन जीने में मदद करती है।
जीवन एक अनमोल उपहार है, और इसे भरपूर जीना हम सबका सपना होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खुशहाल जीवन जीने का कोई रहस्य है?
हाँ, बिलकुल!
जीवन जीने की कला में कुछ सरल सिद्धांतों का पालन करना शामिल है जो हमें सकारात्मकता, आत्म-जागरूकता और कृतज्ञता के मार्ग पर ले जाते हैं।
तो, आइए जानते हैं जीवन जीने की कला के कुछ प्रमुख पहलू:
1. सकारात्मक दृष्टिकोण: जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण रखना बहुत महत्वपूर्ण है। हमेशा आधे भरे गिलास को देखने की कोशिश करें, न कि आधे खाली गिलास को। नकारात्मक विचारों से दूर रहें और हमेशा सकारात्मक सोच को अपनाएं। यह आपको जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने और उनसे सीखने में मदद करेगा।
2. आत्म-जागरूकता: अपनी भावनाओं, विचारों और मूल्यों को समझना महत्वपूर्ण है। आत्म-जागरूकता आपको जीवन में सही निर्णय लेने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करती है। अपनी कमजोरियों और ताकतों को पहचानें और उन पर काम करें।
3. कृतज्ञता: जीवन में जो कुछ भी आपके पास है उसके लिए कृतज्ञ रहें। छोटी-छोटी चीजों में भी खुशी ढूंढने की कोशिश करें। कृतज्ञता का भाव आपको सकारात्मकता और आशावाद की भावना प्रदान करता है।
4. क्षमा: अपने आप को और दूसरों को क्षमा करना सीखें। गुस्सा और नकारात्मकता को अपने अंदर न रखें। क्षमा आपको आगे बढ़ने और खुशी पाने में मदद करती है।
5. दूसरों की मदद करें: दूसरों की मदद करने से आपको आत्म-संतुष्टि और खुशी मिलती है। अपने समय, ऊर्जा और संसाधनों को दूसरों के साथ साझा करें। यह आपको जीवन में उद्देश्य और अर्थ प्रदान करेगा।
6. वर्तमान क्षण में जिएं: अतीत के पछतावे या भविष्य की चिंताओं में न फंसें। वर्तमान क्षण का आनंद लें और हर पल को जी भरकर जिएं।
7. अपने सपनों का पीछा करें: अपने सपनों और लक्ष्यों को कभी मत छोड़ें। उनके लिए कड़ी मेहनत करें और कभी हार न मानें। अपने सपनों को पूरा करने से आपको जीवन में सच्ची खुशी और संतुष्टि मिलेगी।
8. स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं: पौष्टिक भोजन खाएं, नियमित रूप से व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें। एक स्वस्थ जीवन शैली आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद करती है।
9. प्रकृति से जुड़ें: प्रकृति में समय बिताने से आपको शांति और तनाव से राहत मिलती है। प्रकृति की सुंदरता का आनंद लें और उससे प्रेरणा लें।
10. सकारात्मक लोगों के साथ रहें: अपने आसपास सकारात्मक और प्रेरक लोगों को रखें। नकारात्मक लोगों से दूर रहें जो आपको नीचे खींचते हैं। जीवन जीने की कला सीखना एक सतत प्रक्रिया है। इन सिद्धांतों का पालन करके, आप एक खुशहाल, सफल और संपूर्ण जीवन जी सकते हैं।

यह भी याद रखें:
जीवन में उतार-चढ़ाव एक सामान्य प्रकृति है, इसको सामंजस्य बिठाना एक काला है, प्रेम से रहे, कुशल व्यवहार बनाए रखे यही जीवन मंत्र है।
“ईश्वरीय ज्ञान से पाएं समाधान”
ईश्वरीय विश्व विद्यालय में आपका स्वागत है।
ये केवल व्यख्यान ही नहीं बल्कि ये दिल से निकली आवाज है जो आप के दिल तक जाएगी, क्योंकि ये समरसता, सरलता और उदाहरण से परिपूर्ण हैI अगर आपने पूरा वीडियो एक- एक कर सभी सुन लिया तो आप के दैनिक जीवन और व्यवहार में क्रांतिकारी परिवर्तन जरूर आयेगा। आप सभी से नम्र निवेदन हैं कि ये दिल की आवाज सभी के दिल तक पहुंचने में सहयोग करे जिससे हमारा समाज एक जिम्मेदार और ब्यावहारिक बने और सभी का जीवन धन्य हो।हमारा पूर्ण विश्वास है कि इस दिल की आवाज को आप सभी के दिल तक पहुंचने में सहयोग करेंगे।
🙏आप सभी को सहयोग के लिए धन्यवाद🙏
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0:08ओम शांति ओ
0:13श ओम शांति [संगीत] ओ आज का हमारा विषय
0:21है जीवन जीने की
0:27कला अब प्रश्न ये है भाई जीवन तो सब लोग जीते इसमें कला
0:36सीखने की क्या जत तो उसका कारण यह
0:42है कि जन्म से पहले परमात्मा हमें तीन पन्ने की डायरी
0:50देते हैं पहला पन्ना होता है जन्म का दूसरा पन्ना होता है जीवन का
1:00और तीसरा पन्ना होता है मृत्यु का तो जन्म का पन्ना और मृत्यु का पन्ना
1:08परमात्मा लिख कर देते क्यों क्योंकि हमारे पूर्व जन्म में
1:15किए गए कर्मों के आधार पर सुनिश्चित हो जाता है कि आपका जन्म किस परिवार में होगा
1:22कहां होगा और मृत्यु भी कब होगी कहां होगी य सुनिश्चित हो जाता है ये हमारे पू जन्म
1:29के कर्मों के आधार और दूसरा पन्ना सादा रहता है उसको
1:37बाबा कहते हैं कि बच्चे इसको तुम लिखो अपने कर्मों के
1:43द्वारा अब जैसा हम कर्म के द्वारा ना लिखेंगे वैसा हमारा जीवन
1:50बनेगा जीवन तो जीते हैं सब लोग लेकिन कोई गुनगुना कर जीते हैं और कोई भुन भुना कर
1:58जीते हैं गुनगुनाते हैं तो हमें गुनगुना करर
2:05जिए इसके लिए जीवन के दो
2:11पहलू एक है प्रभुता की ओर और दूसरा है पशुता
2:20की जीवन दो पहलू रूप हो गए
2:25दो जैसे रामचंद्र
2:32जी और राव दोनों की रास एकही लेकिन रामचंद्र जी ने अपने जीवन को
2:40कलात्मक धम से जिया तो मर्यादा पुरुषोत्तम बन
2:46गए वह पूज्य हो गए उनकी पूजा होने लगी और रावण को कला नहीं आती थी तो वो असुर बन
2:55गया और हर वर्ष जलाया जाने ल दूसरा कृष्ण और कंस ये भी दोनों एकही दासी
3:04है फिर भी कृष्ण ने जो अपना दिव्य जीवन
3:10जिए तो उनको लोग भगवान मानने लगे और कंस को नहीं मालूम था जिनने की कला
3:20तो राक्षस हो गया असुर हो गया सबको नफरत बवाए मिली
3:26इसको तो ये दो पहल हमारा जीवन दिव्य कैसे हो इसके लिए हमको जीवन जीने की कला जानने
3:35की आवश्यकता पड़ जाती अब प्रश्न यह है कि
3:46भाई कुसी का रास्ता प्रभुता की ओर चली जाती है और किसी
3:53का रास्ता पशुता की ओर चली जाती है कोई का जीवन
4:00प्रभु के अनुसार बनता है और किसी का जीवन पशु के समान बन जाता
4:06है तो परमात्मा को अंग्रेजी में क्या कहते हैं
4:13गॉड गॉड की स्पेलिंग जी ओडी येय परमात्मा
4:20की स्पेलिंग है इसी को अगर उल्टा कर देंगे तो क्या हो
4:26जाएगा डी ओ जीी माना द
4:32माना अर्थात अगर परमात्मा के द्वारा बताए रास्ते पर सीधा चलेंगे तो प्रभुता की ओर
4:41जाएंगे और विपरीत उल्टा चलेंगे तो पसता की ओ चले
4:47जाए इसलिए जीवन जीने की कला को जानने की आवश्यकता अब प्रश्न यह
4:56है कि ऐसा क्यों हो होता है किसी का जीवन प्रभुता की ओ चला गया
5:03किसी का पुस्ता की ऐसा क्यों हुआ इसलिए हुआ कि जो अपने जीवन के महत्व को नहीं
5:11जानते वैल्यू को नहीं जानते उनका पशुता की ओर चला जाता है लेकिन
5:18जो अपने जीवन के महत्व को समझते हैं उनका जीवन प्रभुता की ओर जाता है
5:27जैसे एक लड़का था पढ़ा लिखा था होशियार था चिंतनशील
5:33था वो सोचता था कि भाई हम इस दुनिया में जन्म लिए
5:40हैं बड़े होंगे बच्चे पैदा करेंगे खाएंगे पिएंगे
5:46उनकी परवरिश करेंगे और मर जाएंगे इतना ही के लिए हमारा जीवन मिला है दुनिया में वो
5:52चिंतन करता था लेकिन वो समझ नहीं पाता था कि इस जीवन का महत्व वैल्यू क्या है
6:01तो एक दिन वो बहुत बड़े संत के यहां गया और कहा कि संत जी हमारे जीवन की
6:09वैल्यू क्या है उन्होने कहा कि बताएंगे तुम्हारे
6:14प्रश्न का हम जवाब देंगे लेकिन उसके पहले एक हमारा काम कर दो
6:21और काम यह है कि यह हीरा है हमारे पास इसको जाओ बाजार में बेच के आओ लेकिन न र
6:30इसका कीमत उचित मिलना चाहिए ठीक है करेंगे आपका काम लेकर
6:38गया तो बाजार में गया तो पहले सब्जी वाले भैया यह हीरा हमको बी बेचना है किना
6:47कीमत दोग देखिए ऐसा है की हमें इसकी कीमत की
6:52पहचान तो नहीं है लेकिन अगर ये हीरा हमको आप देते हो तो हमको 10 किलो आलू
7:03नहीं बर्तन वाले की दुकान में भैया य हीरा हमको बेचना है क्या
7:10देंगे कहा इसके बदले में हम आपको पीतल का बड़ा सा
7:15भना फिर आगे ब एक स्कार य गया कहा की देखि हीरा हमको बेचना है आप
7:24इसकी कीमत क्या देंगे इसके बदले एक किलो चांदी
7:29सोचा की दाम तो बढ़ रहा है से और जग पूछ लिया जाए क्योंकि उनका आदेश है की अच्छे
7:36दाम फ दूसरे स् गया व भी हीरा देख और कहे
7:42देखो इसके बदले हम तुमको एक किलो सोना अच्छा फायदा काम
7:50हो उसके बाद जहरी के य गया भया हीरा हमको
7:55बेचना है आप इसत वो पारख नजर से
8:01देखा और कहा कि भैया इसका कीमत हम नहीं लगा सकते क्योंकि
8:08अनमोल हीरा है इसका कीमत हम लगा ही नहीं सकते इसलिए
8:14जो तुम मांगो हम मांग लो जितना चा अनमोल है क्या हम की मत लगाए मांग लो
8:23अब वो बेचारा कन्फ्यूज हो गया भाई हमारा तो है नहीं और इसकी कीमत हमको मालूम नहीं
8:31क अनमल है तो मोबाइल
8:40उसम ठीक है हम इसके मालिक से पूछ कर
8:49आते ठीक कोई बात गया और बताया की महाराज
8:55किसीने इसके बदले किलो आलू देने के किसीने पीतल का भगवाना देने के लिए कहा
9:02किसीने एक किलो चांदी देने के लिए कहा किसीने एक किलो सोना देने के लिए कहा एक
9:08ऐसा जरी मिला जो कहा की इसका मल तो जो मांगो
9:13दे अब बताइए हम कितना मांगे हमारे समझ तो नहीं आ
9:18रहा हमारा काम हो गया इसको र अब तुम्हारे प्रश्न का हम
9:24जवाब और तुम्हारे प्रश्न का जवाब य है जिस तरह से अनमोल है तुम्हारा जीवन भी अनमोल
9:33है इसको व्यर्थ नहीं कवा तुम्हारे हाथ में
9:38है इसको व्यस्त करते हो या व्यस्त करते स्त माना बर्बाद करना अ माना अच्छा
9:47बना संतुष्ट हो गया चलाया
9:53अब हमारा जीवन शुरू होता है बचपन से और कहते हैं कि बच्चों का प्राथमिक
10:02पाठशाला उसका घर होता है उसके माता पिता माता पिता शुरू से ही बच्चों को
10:08अच्छी शिक्षा देते हैं बात बात पर टोक हैं बच्चे ऐसा ना करो ऐसा करो ऐसा ना करो ऐसा
10:16करो बह भी जब आती है घर में तो उसकी
10:22सास टकती है बहु सर पर पल्लू राख कर ऊंची
10:29आवाज बोलो ऐसे कपड़े ना पहनो ऐसे ना चलो बताती
10:34है बुरा लता है लेकिन जो यह मान लेते
10:42हैं य बड़ी है जो क रही है हमारे फायदे के लिए क रही है इसको हमें मानना
10:51चाहिए तो उनका जीवन प्रभु प्रसाद बन जाता है लेकिन जो बुरा मानते हैं उनका जीवन
10:59अवसाद बन जाता है जैसे बड़े बड़े शहरों में चौराहों पर लाल
11:06बत्ती की व्यवस्था हो व ऑटोमेटिक होते अब मान लीजिए की कोई बहुत किसी जरूरी
11:15काम से जा रहा हो बहुत जल्दी हो उसको अवश्य काम है
11:21चौराहे पर गया लाल बती जल गना पड़ क्योंकि सिस्टम है लाल बत्ती जला तो आप वहां
11:30रुकिए उसको भी तो बुरा लगेगा ना कितने जरूरी काम से जा रहे हैं उसको भी अभी जलना
11:36था जल गया रुकना पड़ा लेकिन वो रुकेगा क्योंकि व जानता है कि
11:43अगर यह लाल बत्ती ना हो तो चौराह पर रोज सैकड़ों एक्सीडेंट हो कितने लोग मर जाए वो
11:50अगर लाल बत्ती रोक रहा है हमारी भलाई के लिए रोक रहा है हमारी सुरक्षा के लिए रोक
11:56रहा है तो उसको मानेगा ठीक उसी तरह से अपने
12:02बनों का कहना मानना यानी अपने जीवन को बेहतर बनाना है वो प्रभु प्रसाद बन जाता
12:12है अवसाद नहीं
12:17दूसरा भूलना सीखे कई बार हमारे पूर्व के स्मृतियां
12:23हमको परेशान कर देती है उन्होने हमारे साथ ऐसा किया ने हमारे कर लिया इन्होने ऐसा
12:30कहा ऐसा किया उसी स्मृति में हम दुखी अशांत हो जाते लेकिन उसके साथ
12:38ही कुछ अच्छी सतिया भी रहती है जो हमें सुख देती है सब तो बुरा नहीं करेंगे अच्छे
12:47करने वाले भी है तो अच्छी स्मृतियां तो हमें बुरी स्मृतियों को भूल जाना है और
12:55अच्छी स्मृतियों को याद ना इसके लिए क्या
13:00इसके लिए रामदेव बाबा एक यायाम बताते हैं अनुलोम विलोम सास खींचो सास छोड़ो बताते
13:10हैं तो उस अनुलोम विलोम के साथ अगर हम अपने बुरी स्मृतियों को बाहर निकाले अच्छी
13:19स्मृतियों को अंदर ले जाए सांस के साथ सांस बाहर आती है बुरी
13:25स्मति को बाहर कर सांस अंदर जाती है अच्छी स् को अंदर ले जाए ऐसा करते करते एक समय
13:33हमारे अंदर की सारी बुरी स्मृतियां बाहर निकल जाएंगी बच जाएंगी अच्छी स्मृतियां जो
13:41हमें सुख देंग
13:49तीसरा मान लो तो जी हार है ठन लो तो इसका
13:56रहस क्या मान लो माना परिस्थितियां तो आएंगी माया तो आएगी अगर उनसे हम समझौता कर
14:05लेते हैं अर्थात उसकी कहने को मान लेते हैं अर्थात हम हार जाए लेकिन अगर ठान लिया कि हम श्रेष्ठ
14:14कर्म कर रहे हैं करेंगे हम श्रीमत पर चल रहे हैं
14:19चलेंगे हम कई आत्माओं का भला कर रहे हैं करेंगे यह बात अगर ठान लिया तो विजय
14:27सुनिश्चित है क्योंकि ऐसे संकल्पों के साथ परमात्मा का 100% सहयोग
14:35हमको परमात्मा अपने बच्चों को की परीक्षा लेते हैं परीक्षा ले सकते हैं लेकिन साथ
14:43नहीं छोड़ते और जब वो हमारे साथ होते हैं तो
14:49हमारा विजय तो सुनिश्चित ही है इसलिए हम परिस्थितियों से समझौता ना करें
14:58किसी परिस्थिति में हमारी मन स्थिति ना बिगड़ने पाए इसका
15:04खल मन स्थिति ठीक है चली
15:10जाए चौथा हौसला बुलंद
15:15रख हौसला बुल जिसे कहा की हारि हि मत विसार हरि नाम जाही
15:23विख अर्थात बाबा कहते है कि हि म
15:29म अगर हमारे पास हिम्मत है तो बाबा की मदद हमारे साथ है हौसला बुलंद है तो कोई भी
15:38कठिन काम लगने वाला हम सहजता से कर लेते सहज हो जाता है अगर हिमत है
15:45तो इस को कहते हैं कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत अगर मन हार गया तो हमारा
15:53पराजय सुनिश्चित हो जाता है मन में अगन बल है आत्म बल है
15:59तो विजय भी सुनिश्चित हो जाएगी पांचवा है मुस्कुराना
16:07स मुस्कुरा कई लोग केव तस्वीर में मुस्कुराते कमरान कहेगा माइल
16:17प्लीज यह कोई मुस्कुराना नहीं है मुस्कुराना वो है जो जीवन में रहे जिससे
16:24हमारा चेहरा फूल की तरह खिला रहता है वो
16:30मुस्कुरा जैसे मुस्कुराता कौन है जो सजीव होते है
16:37रा कभी मुर्दे मुस्कुराते है मुर्द कभी देखा किसने मुरा नहीं देखेंगे क मुस्कुरा
16:45ही नहीं सकता मुस्कुराते तो फूल फूल बाड़ी फल बा माना बाड़ी माना होता
16:53है घर अ फूलो के रहने के स्थान को फी
16:59या फूल का बगीचा भी कहा जाता है वहा रायटी किस्म के फल होते तरह तरह के फल होते हैं
17:05लेकिन एक साथ रहते हैं लेकिन कभी किसी ने उनको आपस में लड़ते हुए नहीं देखा वो सदा
17:13खुशी में मुस्कुराते हुए झूमते रहते हैं उस बगिया की सुंदरता को बढ़ाते हैं और
17:19अपने सुगंध से मानव जाति को खुशी देते हैं ये है
17:27मुस्कुराना जीवन में मुस्कुराना सीखे
17:34हम कई बार जीवन में कुछ गलतिया कर जाते
17:41हैं किसी चीज के लिए लड़ाई करते हैं झगड़ा कर देते विवाद हो जाता है मतभेद हो जाता
17:47है लेकिन कहते हैं कि जो सहज मिले वो दूध
17:53बराबर मांगने से मिले वो पानी और वो मिलना है वक्त बराबर जिसम खींचा
18:01था लड़ाई झगड़ा करके ले ही लिए तो क्या कर लिए उसम खुशी नहीं रहेगी सहज मिल जाए
18:08इसलिए बाबा हमें सहज राजयोग सिखा रहे दोबारा दोबारा हैय कि सहज मिले वो दूध
18:19बराबर मांगने से मिले वो पानी और वो मिलना है रक्त बराबर जिसम
18:26खींचा ऐसा हम ना एक
18:32बार एक किसान को एक हीरा मिलया े मल चला रहा
18:38था उसने कहा कि भाई यह हमारे काम का तो नहीं क्या करें इसको बेच देते हैं कुछ पैसे मिल
18:46जाएंगे तो कुछ हमारे काम हो जाएंगे े काम आ जाएगा लेकिन उसकी कीमत उसको पता नहीं क्या
18:53उसको पता है व गया बाजार में तो एक स् गया भैया इसको
19:07बचना लग रहा है की और पूछना चाहिए हो सकता है दम बढ़ जाए दूसरे गया तो कहा की
19:16इसका सोचा की तो पा मिनट में डबल हो गया चलो ब देते कहा
19:23मम वापस लौट रहा था तो पहले ने पूछा रा का क्या हुआ कने बेच दिया कितने में
19:312000 कहा अरे मूर्ख तुमने 2000 बेच दिया
19:36उसकी कीमत दो लाख ी तब किसान ने कहा मूर्ख मैं हूं की तुम हो अरे मुझे तो उसकी कीमत
19:44नहीं मालूम थी तो हमने ब दिया तुम्ह तो मालूम था तुमने तो अपना दो लाख का नुकसान
19:50कर लिया अनजाने में अगर हमारे से कोई गलती हो जाती है और कोई जानबूझ कर करता है
19:59इसलिए बाबा कहते हैं कि अगर जान बूझ कर गलती करोगे तो 100 गुना इसलिए जान बूझकर अपने जीवन के महत्व
20:09को जानकर अगर इसको हम व्यस्त करते हैं तो नुकसान हमारा ही होगा अगर इसको व्यस्त
20:16करते हैं तो स्वामी विवेकानंद बन जाएंगे और व्यस्त करते हैं तो आतंकवादी लादेन बन
20:23जाए दोनों घ आज स्वामी विवेकानंद का पूरे विश्व में
20:29नाम है लादीन को भी लोग जानते हैं लेकिन दोनों में फर्क है उनको उच श्रेष्ठ दृष्टि
20:37से देखते हैं और इसको हे दृष्टि से देखते हैं आतंकवादी र गया काम खत्म
20:44हुआ परिवार में कुछ ऐसे भी सदस्य होते
20:52हैं जिनका आने का इंतजार होता है होता है
21:00भाई रो आ क्या लेट होया क्या बात जल् आता उसके आने का होती है घर में आए क्योंकि
21:09उनके आने से सुख मिलता लेकिन ऐसे भी कोई व्यक्ति होते
21:15जिनके जाने का इतजार होता है कब जाएगा ब जाता बैठ हुआ और जोही पता लगता चला
21:25गया राहत की सास लेते तो जिनके आने का इंतजार होता है उनका जीवन
21:34प्रभु प्रसाद होता है और जिनके जाने का इंतजार होता है उनका जीवन अवसाद होता है
21:41इसलिए हम अपने जीवन को ऐसा बनाए लोग हमारे आने का इंतजार करें जाने
21:50का इसी तरह से एक बार शनि देव में और
21:55लक्ष्मी जीव में टक्कर हो लक्ष्मी जी ने कहा कि मैं बड़ी हूं
22:02क्योंकि हमको सब पसंद करते हैं सबको हम अच्छे लगते सनि देवने
22:09कहा बड़े तो हम है सब हमको पसंद करते हैं
22:14अभी तक रा चल ही रहा था तब तक उधर से आदमी
22:19गुजरा र क जा रहे डर गया प्रभु बोलिए क्या
22:28देख डरो मत ये बताओ तुमको लक्ष्मी जी अच्छी लगती
22:34है की हम अच्छे लगते बराबरा गया अगर कहे की नहीं सव जी अ
22:41ल जी नाराज हो जाए हम कंग हो जाएंगे भाई जीवन हो जाए और क दि नहीं लक्षमी लगती है
22:49स नाराज हो गए तो हमारे बर्बादी सुनि क्या
22:54करे तो कहा देखिए आप दोनों लोग हम ऐसे होगा अरे दोनों में से सबसे ज्यादा
23:03अच्छा कौन लगता है देखिए अच्छे तो आप दोनों है अंतर यह है
23:10लक्ष्मी जी आते हुए अच्छी लगती है और आप जाते हुए अच्छे
23:17लगते फैसला हो गया उसकी बात भी हो उसी तरह से हम अपने जीवन को अवसाद न बनाए प्रभु
23:26प्रसाद बना चार बात अगर हम स्मृति में रखते हैं तो हमारा
23:36जीवन दिव्य बन सकता है वो चार बातें
23:42है पहला है यहा से जाना है य सब जानते हैं सब कुछ
23:50छोड़ कर जाना है ये भी सब जानते हैं क्योंकि धन
23:55संपदा सारी चीज नाते संबंध सब कु छोड़कर
24:00हमको जाना है और सब कुछ छोड़कर जाना है और जाना ही
24:07है अगर इस मृति में रहे तो कोई हम गलत कार्य नहीं करेंगे सही काम करेंगे चोरी
24:16बेमानी ू क्यों करेंगे सब छोड़ कर ही जाना है इसलिए यह
24:24बात सदा दूसरा जो हमारे भाग्य का है व को ले नहीं
24:31सकता किसी भी परिस्थिति में लेगा नहीं मिलेगा हमको ही और जो चला गया व हमारा था ही
24:41नहीं क्योंकि हमारा होता तो जाता नहीं यह स्मति में
24:48रहे तीसरा माता पिता से बड़ा दुनिया में कोई
24:54होता नहीं कोई नहीं जैसे अगर कोई बच्चा पढ़ लिखकर चे ओहदे पर
25:03चला जाता है डीएम बन जाता है जज बन जाता है इंजीनियर डॉक्टर बन जाता है
25:09मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति बन जाता है फिर भी वो अपने माता पिता के लिए
25:16तो बच्चा ही नहीं रहता है अपने माता पिता से ऊंचा नहीं
25:22होगा राष्ट्रपति भी है तो अपने माता पिता को पैर छुए क्यों
25:28उसका कारण ये है कि हर माता पिता की ये आस होती है कि हमारा बच्चा दुनिया में सत
25:38कर्म करेगा ऐसा कर्म करेगा कि हमारा नाम रोशन होगा बाला
25:44होगा इसलिए हर माता पिता बच्चे के जन्म के साथ कहते हैं कि तुझे सूरज कह या
25:54चंदा तुझे दीप कह या तारा मेरा नाम करेगा
26:04रोशन जग में मेरा राज दुलारा हर माता पिता अपने बच्चे को राज
26:11दुलारे के रूप प देखती है इसलिए उनका महत्व ज्यादा है
26:16इसलिए हमको माता-पिता के लिए सबसे अधिक समय निकालना चाहिए उनकी सेवा के लिए उनकी
26:24देखरेख के लिए और उनके कहने में हमको चलना चाहिए इसी में हमारा कल्याण है चाहे कोई
26:31भी [संगीत] हो लेकिन माता पिता का पु पोशन कहीं नहीं
26:37मिल सकता व माता पिता ही है और हमारे तो माता पिता सर्व सवान परम पिता परमात्मा जो
26:45सर्वोच्च सत्ता सु अथ इसलिए उनके किसी भी श्रीमत की हमको अवज्ञा नहीं करनी चाहिए
26:54च चौथा है जीते जी अर्थात शरीर छोड़ने से
27:01पहले हम इतने सत कर्म कर ले ताकि मरने के बाद किसी को यह कहने की
27:10जरूरत ना पड़े हे प्रभु इनके आत्मा को शांति दे कते हैं कोई शरीर छोड़ देते है
27:18तो लाख लोग प्रार्थना करते हैं लेकिन वो मिलता नहीं है कि कहने से परमात्मा
27:26शे हम करेंगे वही हमको मिलेगा इसलिए अपने
27:32जीते व्यवस्था कर ले इना सत्कर्म ज्यादा से ज्यादा कर ले उसकी आवश्यकता ही ना
27:38पड़े मिलना तो है नहीं इसलिए इस बात को सदा स्मति
27:46में हमें बहुत से लोग
27:52है दुनिया में लौकिक में भी जो बहुत ही पढ़े लिखे बड़े बड़े धारी है डॉक्टर है
28:00इंजीनियर है बैरिस्टर है सीए है
28:07है और ज्ञान मार्ग में भी बहुत बड़े बड़े ज्ञानी
28:13है लेकिन किसी ने पूछा कि डॉक्टर साहब आपको क्रोध आता है तो
28:20हा आता है इंजीनियर साब को हमको भी आता है सी साब हमको साब हमको
28:28एक पसर ने कहा कि हमको भी क्रोध आता है चपरासी ने कहा कि हमको भी क्रोध आता
28:34है ज्ञानी ने कहा कि हमको भी क्रोध आता है अज्ञानी ने कहा की हमको भी क आता है अब य
28:41प्रश्न य है कि हमको ज्ञान ने दिया क्या क्या मिला हमको ज्ञान लक जन हो या जन अगर
28:50सबको ही क्रोध आता है तो फर्क क्या है अर्थात ज्ञान से हमको कुछ नहीं मिला हम
28:58अपने आप को ज्ञानी समझते हैं
29:05तो परिवर्तन अगर हम ज्ञानी है चाहे लौकिक
29:10चाहे अलौकिक हमारे अंदर परिवर्तन है तो हमारी प्राप्ति है परिवर्तन नहीं है तो
29:17कोई प्राप्ति है नहीं इसलिए जीवन में हमें परिवर्तन जरूर करना
29:24चाहिए अब क्रोध की बात निकली है तो भाई क्रोध कैसे ना आए हालाकि इस विषय पर विस्तार हम
29:31लोग कर चुके च इसके लिए तीन फैक्ट्री हमको लगाना
29:38पड़ेगा अब कोई कहे तीन फैक्टरी अ इतना न कहा से आएगा लेकिन ये तीन फैक्ट्र ऐसी है
29:45जिनम ना धन की जरूरत है ना बहुत बड़े प्लाट की जरूरत है वो कौन सी तीन फैक्ट्री
29:53है कहां लगानी है इसके बारे में हम लोग चिंतन करेंगे पहली फैक्ट्री आइस फैक्ट्री
30:00अत बर्फ का कारखाना दूसरा शुगर फैक्ट्री अर्थात चीनी
30:07का कारखाना तीसरा लव फैक्ट्री अर्थात प्रेम का कारखाना अब लगाए कहा आइस
30:15फैक्ट्री को दिमाग में लगाए दिमाग ा रहेगा आएगा ही शुगर फैक्ट्री को जुबान पर लगाए जुबान
30:23मीठी हो जाएगी किसी से ल नहीं हो और ल फैक्ट्री को दिल में
30:30लगाए तो सबके प्रति स्नेह प्रेम रहेगा तो लड़ाई झगड़ा होगा नहीं तो क्रोध कहां से
30:36आए ये तीन फिया हमको लगानी
30:43चाहिए अब प्रश्न ये है कि दुनिया में हम देखते
30:50है की कौन है अपना कौन परया हम भ्रमित हो जाते कई लोग चित्र में तस्वीर साथ फोटो
30:58खिंचवा लेते है लगता है कि ये भाई दोनों का चित्र साथ है य इनका कोई होगा आमतौर पर
31:05पति पत्नी का लेकिन जो तस्वीर में साथ होते हैं
31:11जरूरी नहीं कि वो अपने होंगे जो तकलीफ में साथ होंगे वो गटे है कि वही अपना होगा
31:19इसलिए तस्वीर में नहीं तकलीफ में साथ रना है उसम अपनापन होगा इस बात का हम ध्या
31:28एक आदमी वो गया संत जी के पास कहा की संत जी हमको आप
31:37ऐसा उपाय बताइए कि हमारी आय बहुत लंबी हो जाए हम
31:42बहुत लंबी आयत ना चाहते शादी करलो उसने शादी अ शादी से लंबी आयु से
31:51क्या संबंद महाराज आप मजाक कर रहे नहीं शादी कर लोगे तो तुम्हारी लंबी
31:58जीने की इच्छा ही खत्म हो जाएगी समा तो इस तरह के भी लोग है एक आदमी
32:08था जो तीन दिन तक अनुष्ठान किया मंदिर में उपवास रहा
32:17पूजा पाठ किया भजन कीर्तन किया बहुत मगन से परमात्मा को भगवान को आहवान किया वो
32:26देवता खुश हो गए प्रकट हो गए बोलो भक्त क्या
32:31चाहि उसने कहा की हमको ऐसा वरदान
32:36दीजिए सदा रुपयों की झोली हमारे हाथ में हो और हमारे पैर के नीचे गाड़ी हो अच्छ न
32:46माने क था और दूसरे दोन बस का कंडक्टर हो
32:52गया रता है कंडक्टर के पास और सरता है
32:59तो ऐसे ऐसे रदान मांगने वाले भी है जो मांगते हैं
33:05न अब हमको पांच बात और भी ध्यान रखना
33:14प ब ऐसे पर कुछ र जाए
33:21प पहला है अपने सोच कोचा
33:28इसलिए कहा हाई थिंकिंग सिंपल लाइफ अत सादा जीवन उ विचार
33:38सोच चाचा रहेगा तो हमारे कर्म भी चे होंगे और हमारा जीवन
33:45भी जैसे एक बाप के दो
33:50लड़के बाप था सरा
33:57उसका लड़का भी वैसा ही बन गया व भी शराब पीने लगा खेलने लगाने पूछा ऐसा क्यों करते
34:03हो कहा हमारे पिताजी करते थे हम भी कर रहे हैं कौन सा गलत कर रहे है भाई लेकिन उसका दूसरा भाई बड़ा सज्जन था
34:11बहुत शरी था सज्जन तो किसी ने पूछा कि अरे भैया तुम
34:16इतने सज्जन कैसे बन गए ऐसे पिता के कहा कि देखो हमने पिता की दुर्गति हमने देखा
34:24है इसलिए उसी समय हमने कर लिया मैं पिता
34:29के रास्ते पर नहीं चलूंगा मैं अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाऊ एकही बा आपके दो लड़के
34:36सोच बदली जीवन बदल गया इसलिए हम अपने सोच
34:42को ऊचा रखे जितना ऊचा रखेंगे उतना हमारा जीवन श्रेष्ठ
34:49होगा दूसरा संस्कार स्वभाव को सरल बना अभी आए थ
34:57ना बात सरल स्वभाव तो बहुत लोग समझते हैं जो
35:02सरल स्वभाव के होते सीधा सा होते हैं उनको कमजोर समझते हैं कमजोर आदमी किसी काम सरल
35:08स्व लेकिन ये सरलता उनकी कमजोरी नहीं है
35:14उनकी महानता है उनका बड़पन है इसीलिए जो सरल स्वभाव के होते हैं किसी
35:22के दिल में बैठ जाते हैं चढ़ जाते हैं अन्यथा दिल से उतर
35:29जाते परमात्मा भी कहते है बच्चे सचाई सफाई रखो तो उनके दिल पर चढ़ जाते हैं और जिन
35:37में ू भरे कचड़ा भरा रहता है उनके दिल से उतर जाते हैं और जो दिल से उतर गए समझिए
35:45वो कभी ऊपर नहीं उठ सकता गड्ढे में गिरा हुआ व्यक्ति बाहर निकल सकता है लेकिन जो
35:51नजर से गिर जाता है वो कभी बाहर नहीं
35:58लोग स्वार्थ के वशीभूत होकर उससे गवेश के वशीभूत
36:03होकर कितना नीचे गिर जाते हैं ये उनका काम है लेकिन हम कितना ऊंचा
36:12उठेंगे ये हमारा काम है हम ऊंचा उठकर दिखाए वो नीचे गिर कर
36:19दिखाना हु एक दो दो हो गया तीन हो दो हो तीसरा
36:28पारिवारिक दायित्व को निभाए हम सब जानते हैं कि परिवार में
36:33जितने भी सदस्य है उनका सबका अपना अपना हिसाब जुड़ा हुआ है कार्मिक अकाउंट जुड़ा
36:40हुआ है और सबको अपना फर्ज निभाएंगे तभी वो कार्मिक अकाउंट समाप्त
36:46होगा नथा वो अगले जन्म के लिए सुरित र जाएगा
36:52जैसे एक बार एक बढ माता उन्होने पूछा
36:58कि भैया 31 तारीख कब है तारीख तारीख मेरा उपवास
37:07है उपवास है तारीख को कोई रसा उपवास तब उसने कहा कि
37:15देखिए हमारे पति ने बहुत धन कमाया बहुत धनवान लोग थे हम हमारे दो बेटे पति के
37:23देहान के बाद दोनों लड़ गए ई झगड़ा कर लिए न सब बटवारा कर
37:29लिया और उतना ही नहीं हमको भी बंटवारा कर लिया 15 दिन एक भाई खिलाएगा पिलागा 15 दिन
37:37दूसरा भाई खिलाएगा ये तो ठीक है लेकिन जिस महीने में
37:4231 तारीख आता है उस दिन हमको उपवास रना पड़ता है ना बड़ा खिलाता है ना छोटा
37:49खिलाता है भाई इसलिए पूछ रहे थे की क 3 है हमको उपवास करना है ये स्थिति है हमारे
37:56जीवन की माता पिता जिसके धन को उन्होने बाट लिया उने स्व नहीं कमाया था उनका धन था और उसी
38:04माता को भूखा रखते अरे एक दिन में क्या है भाई वो भी बाट लेते एक महीने के को तुम
38:10खिलाना एक महीने के को हम खिलाएंगे तभी चलता लेकिन उने ऐसा नहीं किया ये हमारा
38:19जीवन आदर्श नहीं है इसलिए हम ऐसा
38:24पारिवारिक द को चाहे पति हो पत्नी बच्चा जितने भी दव है य एक उदाहरण था माता का ब
38:31माता सबको अपना अपना फर्ज निना चाहिए ताकि हमारा कार्मिक अकाउंट जुड़ा हुआ है दूसरे
38:39से व समाप्त हो जाए और आगे हो
38:44जाए तीन चौथा है हम अपना उत्तम
38:50व्यवहार उत्तम व्यवहार अब उत्तम व्यवहार
38:56माना देखिए विवाद हो जाता है क्या कहते हैं ईट
39:03का जवाब हम पत्थर से देंगे ना समझ है कभी हमने ईट उसकी तरफ
39:10फेंका था आज वो ईट फेंक रहा है अगर आज पत्थर फेक कल वो पत्थर
39:18फेके तो ईट का जवाब पत्थर नहीं ईट का जवाब प्रेम से अगर देते हैं तो हमारा हिसाब
39:26किताब खत्म होता है अगर पुन पत्थर फेंगे वो पुन पत्थर फेके इससे अच्छा है कि हम
39:34उसको सहन कर ले एक आदमी था दो पदार थे भाई भाई थे अलग
39:40हो गए थे अलग मकान बन गया दोनों में विवाद रहता था कई लोग जब अलग हो जाते हैं तो
39:47विवाद खत्म हो जाता है प्रेम से रते लेकिन कई लोग का विवाद खत्म नहीं होता अलग होने
39:53के बाद अरे वो अपना कमा खा रहा है अपना कमा खा रहा है इस बात का लेकिन अंदर से च
39:59रता है वो सुखी कैसे है हम दुखी क्यों है ज्यादा कैसे कमाता है हम कम क्यों कमाते
40:05को लड़ाई है अपने अपने तकर पु की बात तो दूसरा वाला भाई जब दिखाई देता था तो एक दो
40:13ता था उस कभी हल्का फका लग भी जाता था कभी नहीं
40:18लता व कुछ नहीं ता जाने छोटा भाई है फने
40:24दो ऐसा करते करते उसके पास इतने इकट्ठे हो गए उसने दीवाल बना लिया
40:32उसवाल जब मन में दरा पैदा होता है तो आंगन में दीवाल खड़ा हो जाता है और जब दीवाल
40:39में दरा पड़ता है तो उसे वहा हमको एक दरवाजा लगाने चाहिए और दरवाजा हमेशा खुला
40:47रखना चाहिए कि हमारा आवाजाही संबंध पर बना रहता
40:52कि प्रेम बना रहे एक बात का विशेष
40:57न जब भी कभी किसी के साथ मतभेद हो जाता विवाद हो
41:05जाता चाहे पति पत्नी भी क्यों ना हो बेटा बाप भी क्यों ना हो संबंध कोई भी
41:13हो विवाद हुआ बोलचा ऐसा कभी नहीं करना चाहिए
41:19कम्युनिकेशन बोलचाल बंद कभी नहीं करना चाहिए क्यों क्योंकि हम नहीं जानते कि
41:27किसे कम हमारी आवश्यकता पड़ अगर बोलचाल रहेगा तो सजता उसकी बात क
41:35सकते और बोलचाल ब तो संकोच आगा मु से
41:41बो और व भी क सकता एक साल से नहीं बोलते आज जरूरत प तो बोने के लिए इसलिए कभी भी
41:50किसी परिस्थिति में हम अपना बोलचाल बंद नहीं रखे य उत्तम वहार
41:57चार हुआ पांचवा है दिमाग को ठंडा
42:05रख दिमाग ठंडा ज गर्म गमने समझ रहे दिमाग
42:11ठंडा हो गर्म हो आंखों में शर्म हो और दिल
42:17में रहम की भावना हो तो हमारा जीवन श्रेष्ठ बनने से कोई रोक नहीं
42:24सय पाच बा अब इसके
42:32अलावा कोई समस्या आती है उलझने आती है तो हम रोने लगते चलाने लगते क्यों हो
42:40गया कैसा हो गया ऐसा नहीं होना चाहिए इसके अलावा अगर हम यह
42:48सोचे कि भाई य कैसे होगा नहीं ये ऐसे होगा
42:54इसका समाधान ये है इसका निराकरण य है तो समस्या हल जाएगी तो हमारा दुख खत्म हो
43:00जाएगा इसलिए हमेशा ये सोच की कैसे नहीं य ऐसे
43:06होगा और अंत में हम चर्चा करेंगे कि हमारे दिव्य जीवन के
43:15लिए हमारा जीवन अच्छा हो उसके लिए अपने दिनचर्या को चेंज कर परिवर्तित आज हम दुखी
43:23क्यों है हमा दिनचर्या बिगड़ ग उल् हो गई है सीधी नहीं चल रही है इसलिए
43:31हम प्रभुता की ओर नहीं जा रहे पशुता की ओर जा रहे हैं क्योंकि हमारी दिनचर्या गलत हो
43:36गई उठ वो दिनचर्या हमारा दिनचर्या सुबह से आरंभ होता
43:43है सुबह तीन से चार के बीच में जब उठ जाए उठते ही परमात्मा को गुड मॉर्निंग करें
43:51उनको धन्यवाद करें कि हे प्रभु आपकी छत्र छाया हमारे ऊपर है आप पग पग पर हमारा
43:58सहयोग करते हैं आप हमको शक्ति प्रदान करते हैं सब कुछ आप देते हैं हे प्रभु आपको
44:04बहुत बहुत धन्यवाद इस स्मृति के साथ उनको याद
44:09करें कोई बढ़िया सा भजन लगा ले ताकि याद में सहयोग
44:15हो कोई प्रवचन लगा ले सुने इसके बाद पांच बजे के बाद अपनी दैनिक
44:22क्रिया आरंभ करें तो नंबर वन माताओं को फायदा यह होगा
44:29उनके किचन का काम समय से हो जाएगा परिवार को समय से चाय नाश्ता मिल जाएगा तो सारे
44:36परिवार की दुआएं मिलेंगी और उनको लक्ष्मी का पद मिल जाएगा और भाई लोग
44:45काभी सुबह तैयार हो जाएंगे जल्दी तो आपस ट नहीं पहुंचेंगे दुकान पर विल से नहीं
44:52जाएंगे तो उनको ऑफिस में दाट नहीं सुनने पड़ेगी दुकान से ग्राहक वापस नहीं जाएगा
44:59तो उनकी संपन्नता बनी रहेगी पली बात उनका पूरा जीवन पूरा दिन उ सही
45:09गुजरेगा किसी से लड़ाई झगड़ा नहीं होगा अपना काम करेंगे शाम को आए संक्षेप में
45:16बता शाम को आए तो क्या करें बहुत से लोग
45:22आए टीवी खोल कर बैठ गए टी में क्या आता है समाचार आएगा दुनिया भर का ड़ा सीरियल आएगा
45:30सीरियल में क्या है ल कपट लड़ाई ड़ा ये तो है सीरियल देखेंगे बुद्धि में जाएगा
45:37बुद्धि भ्रष्ट होगी बहुत से भोजन कर रहे टीवी देख भोजन के साथ किच भी जा रहा है
45:44ऐसा ना करे क्या करें परिवार में आए तो देखिए चार काम हमको साथ साथ करना
45:52चाहिए व कौन सा है भजन
45:57भोजन भाषण और भ्रमण अर्थात सुबह अगर उठ कर
46:02के हम लोग सात परमात्मा को याद करें गीत सुने प्रवचन सुने तो वायुमंडल
46:11वहा का पावरफुल हो जाएगा साथ में साथ में भोजन कर भोजन का स्वाद बनेगा मिठास बनेगा
46:18आ क्या है वो अपने रूम में खा रहे हैं वो अपने रूम में खा रहे इससे क्या होता है
46:25तितर बतर हो जाता है सात भाषण चर्चा हम लोग करके भाषण माना
46:33आदान प्रदान बोलचाल किसी से किसी भी परिस्थिति में
46:38बंधन हो बोलचाल हमेशा लगातार जारी हो भ्रमण साल
46:45में एक बार भ्रमण करने के लिए जाना चाहिए परिवार के साथ अकेले नहीं परिवार के साथ
46:50जाएंगे तो उससे क्या होता है वायुमंडल चेंज होता है तो बुद्धि को खुराक मिलता है
46:57और नए अनुभव होते हैं तो बुद्धि में खुशिया आती है इसलिए चार काम करना तो शाम
47:04को भी क्या करे साथ बैठक अरे सुबह तो मान लीजिए भाई आप जाना है दुकान जाना जल्दी
47:09जल्दी में साथ ना भी बैठे शाम को पूरा परिवार एक साथ बैठकर भोजन
47:15करे प्रवचन सुने बढ़िया भजन सुने और 10 बजे के पहले सो जाए 10 बजे के
47:25पहले सोए तो सुबह तीन चार बजे आराम से उठ जाएगी
47:31नींद गहरी आएगी तो स्वप्न नहीं आएंगे और
47:36आराम से हम सुबह उठ कर के अपना दिनचर्या शुरू कर लेंगे अंतिम स्टेज में हम लोग चल
47:43रहे नहीं हा टाइम ज्यादा नहीं हुआ है अपने
47:49जीवन में हम जीएसटी लागू
47:55कर जीएसटी कौन सी जीएसटी भाई एक जीएसटी के लिए तो बहुत होला हुआ था हम नहीं मानते
48:01जीएसटी को लेकिन जो जीएसटी यहां चर्चा हो रहा है वो जीएसटी अगर जीवन में है तो
48:06हमारा जीवन धन हो जाएगा वो जीएसटी कौन सी तीन अक्षर है जी
48:12एसटी जी फार गुड थिंकिंग अच्छी सोच सकारात्मक सोच एस फॉर
48:22सिंपल लाइफ साधारण जीवन और टी फॉर टेंशन फ्री लाइफ अत तनाव मुक्त जीवन ये
48:31जीटी अगर हमारे साथ है तो हमारा जीवन तो स्वामी विवेकानंद बही जाएगा और सुखी हो
48:43जाएंगे जी फर गुड थिंकिंग हा अच्छा सोच सकारात्मक
48:50सोच हा अब समय के लिए बहने क रही है तो अंत
48:57में हम यह कहेंगे कि जो बीत गई सो बात
49:06गई तकदीर का सिकवा कौन करे जो बीत गई सो बात गई तकदीर
49:18का सिकवा कौन करे जो तीर को मान से निकल गए
49:27उस तीर का पीछा कौन करे
49:33[प्रशंसा]