परमात्मा का यथार्थ परिचय…… जानिए परमात्मा कौन है, दिखते कैसे, रहते कहा है, करते क्या हैं आदि.
आज हम बात करेंगे परमात्मा के बारे में, जो कि सृष्टि के आदि, मध्य और अंत हैं।
वे सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ हैं।
परमात्मा का यथार्थ परिचय सदैव से ही मनुष्यों के लिए जिज्ञासा का विषय रहा है।
तो, आइए जानते हैं परमात्मा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें:
परमात्मा कौन हैं?
परमात्मा को विभिन्न धर्मों में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे कि ईश्वर, ब्रह्म, अल्लाह, राम, कृष्ण, आदि।
वे सृष्टि के कर्ता, पालक और हर्ता हैं।
वे निर्गुण और सगुण दोनों रूपों में विद्यमान हैं।
निर्गुण रूप में वे निराकार, अनादि और अनंत हैं,
जबकि सगुण रूप में वे विभिन्न देवी-देवताओं के रूप में पूजे जाते हैं।
परमात्मा का कोई भौतिक रूप नहीं है।
वे आत्मा, चेतना, या प्रकाश के रूप में हैं।
वे इंद्रियों द्वारा देखे नहीं जा सकते,
लेकिन उन्हें मन, हृदय और आत्मा से अनुभव किया जा सकता है।
परमात्मा सर्वव्यापी हैं।
वे हर जगह विद्यमान हैं,
अंतरिक्ष में, पृथ्वी पर, और हमारे भीतर भी।
वे अणु से लेकर ब्रह्मांड तक हर जगह मौजूद हैं।
परमात्मा सृष्टि का निर्माण, पालन और विनाश करते हैं।
वे जीवों को जीवन देते हैं और उनकी रक्षा करते हैं।
वे कर्मों का फल देते हैं और मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं।
वे सदैव दयालु, क्षमाशील और न्यायप्रिय रहते हैं।
परमात्मा से जुड़ने के कई तरीके हैं, जैसे कि:
- भक्ति: ईश्वर की भक्ति करने से मन शांत होता है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने में मदद मिलती है।
- ध्यान: ध्यान करने से मन एकाग्र होता है और आत्मा को परमात्मा का अनुभव करने में मदद मिलती है।
- कर्म योग: निष्काम कर्म करने से मन शुद्ध होता है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने में मदद मिलती है।
- ज्ञान योग: आत्म-ज्ञान प्राप्त करने से आत्मा को परमात्मा का स्वरूप समझने में मदद मिलती है।
- सेवा: दूसरों की सेवा करने से मन में प्रेम और करुणा बढ़ती है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने में मदद मिलती है।
- परमात्मा प्राप्ति धीरे-धीरे होती है। इसके लिए धैर्य, लगन और निष्ठा की आवश्यकता होती है।
- परमात्मा प्राप्ति का कोई एक निश्चित मार्ग नहीं है। हर व्यक्ति को अपनी आत्मा के अनुसार मार्ग चुनना होता है।
- सच्चा परमात्मा हमारे भीतर ही विद्यमान है। हमें बस उसे ढूंढने का प्रयास करना होगा।
आशा है कि यह ब्लॉग आपको परमात्मा के यथार्थ परिचय को समझने में मदद करेगा और आपको उनसे जुड़ने का मार्ग दिखाएगा।
शुभकामनाएं!
अतिरिक्त टिप्पणियाँ:
- अंत में, यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि विभिन्न धर्मों और संप्रदाओं में परमात्मा की अवधारणा भिन्न-भिन्न हो सकती है।
- यह ब्लॉग केवल एक सामान्य परिचय प्रदान करता है।
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प्रतिलेख नीचे दिया गया है-->
https://youtu.be/e07Y_JajuYI?si=04JPeH-Nm_Yoktgo
Transcript
0:39ओम शांति ओम शांति
0:49ओम शांति [संगीत] अभी हम लोगों ने
0:55बाबा के या कानून
1:09विस्तार से जानते हैं तो आज के दुनिया [संगीत]
1:15बहुत सारी समस्याएं और सभी अपने अपने समस्याओं से जूझ रहे हैं
1:24और अपने अपने तरीके से अपने
1:30समस्याओं का समाधान करने में ड्यूटी हुई है लेकिन एक वर्ग ऐसा है
1:39जिम सभी की एक ही समस्या है और वो वर्ग है प्रभु प्रेमियों की
1:47सभी प्रभु प्रेमियों के ही समस्या है की कौन है परमात्मा
1:53दिखते कैसे हैं रहते कहां हैं करते क्या
1:58हैं और उसे हमारा मिलन कैसे हो इसे समस्या के समाधान में जूते हुए हैं
2:08तो यह समस्या आज से नहीं इस समस्या बहुत कल पहले से है
2:15हमारे ऋषि मुनियों ने भी खोज किया और जो
2:21भी कुछ उनको प्राप्त हुआ उसके आधार पर उन्होंने शास्त्रों की रचना
2:27की लेकिन अंत में उन्होंने नीति नीति लिखा
2:33नीति नीति माना एन धन की थी अर्थात जो हमको मालूम था हमने बता दिया लेकिन यही
2:42इसका अंत नहीं है इसके बाद भी और कुछ है और आगे कहा की उनकी gatimati वही जाने
2:51अर्थात परमात्मा अपना परिचय क्यों दे सकते हैं ये कोई दूसरी जान सकते
2:58तो इस तरह से हमारा भटकना बंद नहीं हुआ
3:04एक बार
3:11तुमको कहा की आप लोग हाथी घर में जाइए और दिल किया है की हाथी कैसा होता है
3:19अब सूरदास की दो आंख रहती नहीं है वो स्पर्श के माध्यम से जो अनुभव होता है
3:26उसकी संरचना को बताते हैं तो उसी तरह से पांचो सूरदास गए हाथी घर
3:32में किसी ने हाथी का पेट पकड़ने हाथी तो
3:38बिगाड़ जैसा किसी ने कैद पकड़ा करने
3:43जैसा है किसी ने पूछ पकड़ा ही नहीं हाथी तो रस्सी
3:49जैसा है नहीं हाथी तो सुख जैसा है
3:55और जिसके लिए सूट पकड़ा काज नहीं हाथी तो साथ जैसा
4:01अब प्रश्न ये है की क्या हाथी दीवार जैसा खनिज जैसा रस्सी जैसा सुख जैसा और सांप
4:10जैसा है या हाथी की आकृति कुछ और है
4:15तो सत्य की हाथी की आकृति कुछ और है लेकिन उनकी आंखें ना होने के कारण जो कुछ भी
4:23उनको समझ में आया स्पर्श के आधार पर हमें बता दिया वही हाल हमारा हुआ
4:29हमें परमात्मा का यथा अर्थ ज्ञान होता नहीं और जो भी हमको मिला
4:35हमने उसी को भगवान का दिया जैसे अगर कहीं हम
4:42किसी विपत्ति में है परिस्थिति में है और किसी मनुष्य नहीं हमारा सहयोग कर दिया
4:50गरीब भाई हमारे लिए तो आप ही भगवान कहते हैं लेकिन कांग्रेस को भगवान तो नहीं
4:56होंगे इसी तरह से गोसाई जी ने भी कहा की चले सुने बिनु का
5:08ना कर बिन कर्म करें विधि नाना
5:13सहित [संगीत]
5:20अर्थात उन्होंने कहा परमात्मा की महिमा करते हुए उनके पैर नहीं है बहुत तेज चलते
5:28कम नहीं है लेकिन सब कुछ सुनते हैं हाथ नहीं है लेकिन सबसे ज्यादा कम करते हैं
5:36उनका स्वास्थ्य इंद्री नहीं है लेकिन सारे व्यंजनों का रोजगार भस्म लेते हैं
5:43उनकी वाणी नहीं है उन्होंने परमात्मा की महिमा तो बता दिया
5:50लेकिन इस महिमा वाले कौन हैं या नहीं बताया
5:56फलस्वरूप हमारा भटकना बंद नहीं हुआ भटकते रहे खोलते रहे और चलते हैं
6:04अब कुछ विद्वान भाई बहनों के मत पर हम विचार करेंगे
6:09उनके मत इतने सही हैं या गलत हैं तो सबसे पहला मत
6:18है कुछ लोग ने कहा की गण नेचर
6:23अर्थात प्रकृति ही परमात्मा है उनका कहने का ये कारण था ये विशाल प्रकृति
6:31जिसका कोई अंत नहीं उसी के तत्वों से हमारे शरीर का निर्माण
6:38हुआ है और हमारे लिए बहुत कुछ देती है और खुद
6:43देती है जो समाप्त नहीं होता तो हमने उसको भगवान मैन लिया
6:51रचना है तो जरूर से कोई रचयिता होंगे रचना है तो
6:59रचयिता ग्रांटेड है इसीलिए किसी ने प्रकृति की सुंदर छाता को
7:06देखकर कहा की जिसकी रचना इतनी सुंदर वो
7:11कितना सुंदर होगा और वो रचयिता के सौंदर्य में हो जाता है
7:18की प्रकृति उनकी रचना इतनी सुंदर है
7:26इसी तरह से एक बार स्वामी विवेकानंद कहीं जा रहे द
7:32तो रास्ते में उन्होंने बहुत सुंदर कन्या को देखा
7:37बहुत सुंदर थी स्वामी विवेकानंद खड़े होकर उसको निहारने लगे
7:45तब लड़की ने कहा क्या एक सन्यासी तुम सन्यासी हो और सन्यासी होकर एक लड़की को
7:52घर रहे हो तब स्वामी विवेकानंद ने बड़ी नम्रता से कहा की बहन
7:59मैं तो यह देख रहा था की जिसने इतनी सुंदर रचना की
8:06वो कितने सुंदर होंगे मैं तो उनके समदड़ी में खो गया
8:12तब लड़की समझ गई और बड़ी शर्मिंदा हुई और
8:18विवेकानंद के पैरों पर पद गई और क्षमा मांगते भी कहीं की मैं ने भूल किया है
8:24उनको तो यह कहीं भी कोई भी चीज है अगर है तो
8:33उसका निर्माता जरूर है इसका विस्तार हम लोग अगले दिन करेंगे
8:41तो दूसरा
8:54मत है आत्मा से परमात्मा का दिया तीसरा मत दिया की परमात्मा को सौरव गति है
9:03चौथा मत दिया सब देवताओं का ही परमात्मा है किसी ने
9:09किसी देवता को किसी ने किसी देवता को मान्य परमात्मा ये चार विचार तो पहले विचार को हम लोग चिंतन कर चुके
9:16की प्रकृति परमेश्वर नहीं है दूसरा कहा आत्मा सो परमत ऐसा क्यों कहे
9:25उसका कारण ये है की कहा की ईश्वर अंश जीव अभ्यास अर्थात ये
9:33आत्मा ईश्वर के अंश नहीं बता दिया को परमात्मा
9:39लेकिन ऐसा हो नहीं सकता क्यों नहीं हो सकता
9:44क्योंकि आत्मा परमात्मा का अंश है यह सही है तो आत्मा में परमात्मा के गुण हो सकते हैं
9:54लेकिन प्रमाता तो नहीं हो सकता है जैसे
9:59lokgeetta में कोई पिता है और पुत्र हैं तो वह पुत्र जरूर अपने पिता का
10:06उसमें गुण हो सकता है चलना उगना बैठना बोलना वो मैच कर सकता है
10:14लेकिन वो उठी ना है और पिता पिता है
10:19लेकिन वह पिता नहीं हो सकता मध्य की बच्चा बहुत दूर हूं हर है
10:35मैन लीजिए की वो डीएम हो गया
10:43तो वो बेटा ही एन रहेगा और ये पिता ही रहेंगे पर कितना हो गुण ए जाए
10:50लेकिन बेटा बेटा ही रहेगा और पिता पिता ही नहीं भर परिचय बदल जाए
10:57पहले लोग परिचय देंगे की फराना के पुत्र अपाचे होगा की डीएम साहब के पिताजी है
11:06परिचय
11:11अगर बेटा सिस्टर जानी है उन पर होते हुए पिता के पैर रहा
11:21आशीर्वाद लेगा और कोई बात होगी तो उसे राय भी लेता है और उसी में कौन है लेकिन फिर
11:29भी अगर सिखाई जाती है तो और भी तो बात छोड़ दिया
11:34तो इस तरह से हमारे अंदर परमात्मा के आत्मा के अंदर गुण
11:39ए सकते हैं लेकिन हम परमात्मा नहीं हो सकता दूसरी बात
11:44अब आत्मा से परमात्मा यह बात ए गई तो मंदिरों में हम जाते हैं
11:51तो कहते हैं की आप मठ किताब बालक के अर्थात कहते हैं की परमात्मा हमारी माता
11:59पिता है हम उनके बच्चे हैं अगर आत्मा से परमात्मा सभी परमात्मा ही हो
12:05गए तो बच्चे कहां गए इसलिए ये भी सिद्धांत गलत हो गया आत्मा से
12:14परमात्मा तीसरी बात की मैन लीजिए की हम एक बाल्टी समुद्र का
12:22पानी लेट हैं रख देते हैं तो उसे बाल्टी के पानी में समुद्र के पानी
12:28के सारे गुण मौजूद हैं लेकिन वो क्या कहलाएगा इस समुद्र का जल है
12:35उसको समुद्र नहीं कर सकते क्योंकि समुद्र समुद्र है और उसका जल है उसको समुद्र नहीं
12:42कहेंगे क्योंकि उसी का अंश है अंश होने से गुण ए जाएंगे लेकिन उसका और उनको नहीं मिल
12:50सकता इसलिए atmasukh परमात्मा कहना
12:55राम है ऐसा नहीं है तीसरी बार कहा की इन परमात्मा दूसरों
13:02हो जाती है और स्वर व्यापी कहना सैद्धांतिक रूप से तो गलत है लेकिन
13:10भावनात्मक रूप से सही कैसे स्कूल विचार करेंगे
13:16तो अगर परमात्मा सौरव व्यापी हैं यहां तक कहा की कण-कण में है हर जगह मौजूद हैं
13:23तो फिर उनके लिए हम मंदिरों में मस्जिदों में गुरुद्वारों में तीर्थ पर क्यों भटकते
13:29हैं अगर हर जगह मौजूद है तो हम वहीं उनकी फिजा राना
13:34करें हम जाते हैं मंदिरों में अर्थात परमात्मा नहीं
13:41दूसरी बात मैन लीजिए की परमात्मा यहां है
13:47और दो लोग लड़ गए आप गली गलौज किए मारपीट कर दिए और परमात्मा
13:54ही मौजूद है तो क्या कहेंगे लाडो खूब लाडो
14:02पिता छुड़ाने हैं ना भाई लड़ाई ना करो आपस में प्रेम से ना हो
14:09अर्थात परमात्मा नहीं
14:17तो हम कहीं थूकते हैं लहू समता करते हैं दीर्घ संका करते हैं तो
14:24क्या परमात्मा से कम करते हैं अर्थात परमात्मा और परम
14:32अब प्रश्न यह उठाता है की भाई
14:38तो इसके लिए हमारे ऋषि मुनि जो durdashahta द वो जानते
14:45द की आगे बहुत ही paatpan होने वाले हैं उन्हें का दिया की ऐसे मनुष्य
14:51तो कोई बात का कम नहीं करना क्योंकि परमात्मा सर्वज्ञ है और उसे उनको देख रहे
14:58हैं ये भाई पैदा उन्होंने किया की हमसे कोई गलती ना हो कोई बिगड़ ना ही कोई पाप
15:04कर ना हो क्योंकि अगर भाई लगा के परमात्मा यही है हमको बेच रहे हैं कम नहीं कर सकते
15:14चौथी बात भक्त लोग जो बहुत ज्यादा भक्त करते
15:22हैं की भाई हमको साक्षात्कार हो जाए
15:27तो जो सच्चे भक्त होते हैं और जिस देवी देवता क्योंकि परमात्मा को जानते नहीं वो
15:33देवी देवता के साक्षात्कार के ही इच्छुक होते हैं तो परमात्मा उसे देवी-देवता का साक्षरता
15:41कर जाता है तो इसीलिए यहां किया किसी ने वहां किया किसी ने वहां किया तो पहले
15:46परमात्मा किया है
15:51डराने वाले कोई और है लेकिन का दिया की भाई
15:57[संगीत] सर्वव्यापी कहानी
16:06जिसको जिससे प्रेम रहता वही दिखाई देता है
16:18कोई और दिखाई नहीं देता था
16:23तो का दिया सर्वत्र है हालांकि स्रोत तो है नहीं वो
16:28देखता है lokirta में भी इसको इससे प्रेम होता है
16:34सर्वप्रथम वही दिखाई देता है इससे भी का दिया की परमात्मा स्वर्ग
16:40व्याख्या लेकिन ये भावनात्मक रूप से सही है लेकिन उससे गलत है
16:48अब हम आते हैं चौथे मार पर
16:53क्योंकि परमात्मा का यथार्थ परिचय ना था तो उन्हें सब देवताओं को ही मैन लिया देवी
17:00देवता मैन लिया इस देवी देवता से कुछ मिला कुछ सहयोग मिला कुछ पैदा हुआ कहा की हान
17:08और यही कारण है की देवताओं में भी एकमत नहीं है कोई श्रीकृष्ण को मानते हैं कोई
17:15श्री रामचंद्र जी को मानते हैं कोई श्री शंकर जी को मानते हैं कोई अन्य अन्य
17:20देवताओं को लेकिन मानने से तो ये आधार तो नहीं होगा
17:26तो सबसे ज्यादा लोग श्रीकृष्ण को भगवान मानते
17:31हैं परमात्मा इसको हम लोग विचार करेंगे तो
17:37महाभारत की लड़ाई चल रही थी और भीष्म
17:42पितामह बांसिया पर पड़े हुए द
17:47तो श्री कृष्ण पांडवों के साथ उनसे मिलने के लिए जाए तब भीष्म पितामह ने स्पष्ट पूछा
17:55की ही श्री कृष्ण क्या आप परमात्मा है उन्होंने अपने रूप में परमात्मा नहीं हूं
18:02स्पष्ट कर दूसरी बात
18:07गीता में भी कहा मैं अजन्मा हूं मैं उपभोक्ता हूं मैं आशा
18:14सोचता हूं मैं जन्म मनुष्य nyaaran हवा के तो नहीं हो सकता
18:23[संगीत] एक श्लोक है
18:39अर्थात इस महीने कहा की हेली आप सारे धर्म को छोड़कर उसे एक ईश्वर के
18:46शरण में जाओ मैं तुम्हें सारे पापों से
18:53अगर वही भगवान होंगे तो किसी दूसरे के पास क्यों भेजते
18:58होता है परमात्मा अब बात ए गई श्री रामचंद्र जी
19:07रामचंद्र जी के जीवन का गाथा की किया तुलसीदास जी ने उन्होंने जो परमात्मा का
19:17महिमा का वर्णन किया उसमें श्रीरामचंद्र जी कितने मैच नहीं करते
19:24दूसरी बात जब सीता जी का अपहरण हो गया
19:31जंगल में भटक रहे द और पूछ रहे द
19:39मधुकर सैनी देखी
19:46अर्थात उन्होंने पशु पक्षियों से पूछा की क्या आप लोगों ने सीता जी को देखा
19:52अगर वो स्वयं परमात्मा होते किसी से पूछने की क्या जरूरत थी परमात्मा
19:59को सब कुछ जानने वाले हैं तो खुद जान जाता है इसका कम है इससे यह भी विचार
20:06कट जाता है इसके अलावा बहुत सारे देवी देवताओं को लोगों ने कहा
20:17तो तीसरी बात ये है इस बात को स्वरूप मांगते हैं की परमात्मा
20:24एक है
20:29सब मानने इस बात की परमात्मा एक है लेकिन देवता
20:39महात्मा एक हैं तो इतने सारे भगवान कैसे हो सकते हैं
20:48वो भी मानते हैं की सबका मलिक एक और अपने को कहा
20:54की मैं परमात्मा का संदेशवाहक हूं मैं परमात्मा नहीं
21:00तो इससे सिद्ध होता है यह देवता लोग देवता लोग हैं परमात्मा नहीं
21:09हुआ [संगीत] परमात्मा के इतिहास परिचय क्या है
21:17तो किसी के भी परिचय के लिए पंच बातें चाहिए पहला नाम
21:24दूसरा रूप तीसरा धाम हाथ पता एड्रेस प्रत्यय कहां है
21:31चौथा उनका कर्तव्य क्या है और पांचो अंतर मूल क्या है ये पंच बातें अगर हमें मालूम
21:38हो तो किसी का भी घाट पर प्राप्त कर सकते हैं और ऐसा हम लोग करते हैं
21:45तो सबसे पहले नाम तो परमात्मा का नाम है शिव और शिव का अर्थ
21:54होता है कल्याणकारी नाम का बहुत ज्यादा महत्व होता है और नाम
22:00का असर कोई जीवन प्रवाह ता इसीलिए पहले नामकरण संस्कार हुआ करता
22:07था जब बच्चा जन्म लेता था तो माता-पिता उसको लेकर के गुरुजी के पास जाते द नामकरण
22:15संस्कार के लिए गुरुजी उसे बच्चे का भूत भविष्य वर्तमान
22:20को देखते द क्योंकि उसे समय की sadhusan पहुंचे हुए होते द और उसके आधार पर जो गुण
22:28होता था बच्चे का उसका नामकरण करके और वो सबको स्वीकार है
22:34धीरे-धीरे परंपरा खत्म हुए हैं और अब लगभग 90% समाप्त करिए 10%
22:43परिणाम क्या हुआ हमने अपने मैन से बच्चों का नाम रखना शुरू करते हैं
22:53[संगीत] पता ही नहीं चलता है की आदमी का नाम है या
23:02[संगीत]
23:09इसी क्रम में
23:14एक बार एक लड़के का विवाह होगा
23:19पहले के समय में विवाह मंडप विवाह हुआ था होता था अर्थात
23:26अरेंज महीने से छूटता उसमें प्रेम विवाह नहीं होता अब प्रेम विवाह भी हो गया है इसे लव मैरिज
23:34कहते हैं यह दो विवाह अब दोनों विवाह में
23:39होता है वो माता पिता साजिद होता है उन दोनों के गुना को टेली करते हैं और अब भी
23:48बात तय होता है तो वो विवाह अस्थाई होता है
23:54लेकिन जो मिला मैरिज आजकल हो रहे हैं किसी की कुंडली से कोई मतलब है
24:02लेकिन वह अस्थाई होता है टेंपरेरी होता है इसका क्या कारण है
24:08इसका कारण यह है की पहले जो अरेंज मैरिज होता था माता पिता तय करते द
24:15तो लड़की लड़कियां कुंडली पायलट द गुण मिलते द तब वो शादी का
24:21होता है और शादी से पहले एन तो लड़का लड़की को जानता था तो लड़की लड़की को
24:29जब विवाह होता था तब से उनका परिचय होता था और प्रेम वहां से शुरू होता है
24:36प्रेम होते-होते तब तक कई बच्चे हो जाते हैं
24:43और वो अपने परिवार में मिल जाते माया ममता में तो आधी मठ को ऐसे ही जाती और विवाह
24:51सफल हो जाता है आज क्या होता है की पहले प्रेम होता है
24:57प्रेम होते होते जब ऊंचाई पर पहुंचता है तब सोचते हैं की अब विवाह कर लेना चाहिए
25:04कभी-कभी तो ऐसा भी होता है की जो कम विवाह के बाद होना चाहिए वह नहीं हो जाता
25:12है की जो कुछ ऊंचाई पर जाएगा उसके बाद उसी गिरावट होगी उससे अधिक ऊंचाई
25:19तो नहीं जाए पर पहुंच गया और तब विवाह हुआ तो वहां से
25:26गिरावट शुरू होने लगी और मामला तार पर ए गया और वो कोर्ट कचहरी में चले जाते हैं
25:32सफर नहीं होता है इसीलिए पहले विवाह अधिकतर सफल होते द तलाक
25:39वाली बात तो बहुत से लोग जानते ही नहीं द की तलाक क्या होता है बेताल तो मुसलमान के
25:44जवाब नहीं सन लिया जान लिया
25:49तो उसमें की बात है जो अरेंज मैरिज होता था तो साथी ही
25:56तो लड़के ने पूछा की भाई आपका नाम क्या है क्योंकि परिचय तो नाम से ही शुरू होता है
26:02उसने कहा की मेरा नाम है चेतन
26:09तुम्हारे माता पिता
26:32अगर आपको ये नाम पसंद नहीं है तो कोई बात नहीं आप कोई बढ़िया सुंदर सा नाम रख दिया
26:38जाएगा लड़के हैं यह ठीक रहेगा अब बढ़िया ना
26:44तुम्हारा भी ठीक है तय होगा हो गया कल सुबह हम
26:50जाएंगे और वो ही नाम तुम्हारा कम रखेंगे लड़की की कोई चीज कोई बात नहीं आई
26:57सुबह हुआ लड़का तैयार होकर के निकाला अभी
27:02कुछ ही दूर गया था उधर से अर्थी ए गई
27:07उसने पूछा की भाई ये किसकी अर्थी है तो लोगों ने बताया की अमरनाथ
27:15अरे नाम अमरनाथ और जवानी में सर छोड़ दीजिए
27:20[संगीत]
27:29भारी भारी आपका नाम क्या है कहा की हमारा नाम है धनपत अभी घर पर अरे नाम है धर्म का
27:37तमाम है वो भी और ये नाम एक दम बिता है ना
27:43आगे बढ़ा जाते जाते देखा की घर में बहुत सुंदर लड़की थी तो धान कूट
27:50रही थी सोचा की लड़की स्वीकार है जिसका नाम ही सुंदर होगा
27:55पूछा की बहन आपका नाम क्या है कहा की हमारा नाम है लक्ष्मी अरे नाम
28:02याकूब वीडियो डांस
28:13घूमते घूमते चारों तरफ थक गए शाम हो गया और घर वापस ए गया
28:20इधर उनकी पट्टी बड़ी खूबसूरत भाई पता नहीं कैसा सुंदर ना ढूंढ कर लाएंगे और हमारा
28:26नया नामकरण होगा उसकी जान ने लेकिन तब की प्रति आज की पत्नी अगर हॉट गई
28:34तो घर में प्रवेश करते पहला प्रश्न
28:44है आपकी से आए हैं दुकान से आए हैं खेत से ए रहे हैं उनकी मस्ती कैसी होगी उसको पानी
28:51दे हाथ पैर मत लेट्स कर हिल गया
29:00लेकिन उसे तब के पत्नी थी उन्होंने धारिता रखा
29:06पानी उन्हें पिलाया कुछ दिया खाने के लिए तब धीरे से कहा
29:12की आप कौन सा नाम ढूंढ रहे हैं अब वो बेचारा क्या बोले द चुपचाप फिर धीरे
29:20से कुछ जानने की बड़ी इच्छा हो रही है क्या नाम
29:26दून कर रहा है तो तीसरी बार उसने पूछा तो कहा की
29:34अमरनाथ को मरते देखा और dhanpattiman में भी
29:39और लक्ष्मी को धान कूटते देखा की हत्या
29:56उसी तरह मनुष्यों के साथ है परमात्मा के साथ ऐसा
30:02नहीं है क्योंकि परमात्मा की जितने भी नाम है बहुत सारे नाम है लेकिन सारे नाम उनके
30:10उन पर आधारित है लोगों ने अपने भाव ए गया था पर उनका नाम कर दिया भूल के आधार
30:17दूसरा उनका रूप कैसा है देखने में कैसे
30:24सूक्ष्म ज्योति इन आंखों से दिखाई नहीं देता
30:30कैसे दिखाई देंगे पंक्ति की आंखों से किसका किसका नाम लोग अगली देखता है
30:37तीसरा पता क्या है तू रातें सबसे ऊपर
30:45परमधाम में रहते हैं इसको शांति धान निरवाना धन भी कहा जाता है
30:52सबसे वहां लड़ते हैं परमात्मा उनका बताइए
30:59चौथा उनका कर्तव्य क्या है तो उनका कर्तव्य है पुरानी दुनिया
31:05[संगीत] नई दुनिया बनाना और पति को पवन बनाना उनका
31:10यही कम करते हैं क्योंकि मनुष्य नहीं कर सकते
31:16और पांचवा उनका गुण क्या है तो कहा गया है की परमात्मा गुना में अनंत
31:24है उनकी गुना की कोई सीमा नहीं है मुंह में आनंद है वो
31:30यहां तक कहा गया की उनके गुना की महिमा
31:36सरस्वती लिखने बैठे सारे समुद्र को स्याही बना दिया जाए सारे
31:43जंगल को कमान बना दिया जाए तो भी उनका महिमा का पूरा नहीं हो सकता ये उनका महिमा
31:52है अब वह प्रश्न यह आता है कोई का सकते हैं
31:57की भाई हमें कैसे मैन लें की परमात्मा के
32:02आधार पर है कर सकते हैं क्योंकि जो पहले जानते द उसको मिटाना का
32:10दिक्कत होता है तो इसके लिए क्या है की मान्य की रास्ते
32:15में हूं कोई पीढ़ी धातु मिल गई हमको रास्ते में
32:21हमने उठा लिया उलट पलट कर देखा लेकिन समझ में नहीं आया
32:27कभी कौन सी है सोना है पितर है क्या समझ में नहीं आया तो क्या करेंगे उसको किसी
32:33स्वर्ण था की पास ले जाएंगे और चेक करके बताइए की कौन सी धातु है
32:47कब बताएंगे इस बात को वही मैन जाएगा क्योंकि कसौटी पर
32:56कसमे के बाद उसने बताया अगर वैसे ulatgarh देखते ही बता देते की नहीं पिता है तो मैन
33:03में शंका हो सकता था की भाई हो सकता है की समझ में ना आए लेकिन जब तो 100 ही बरस
33:08दिया गया [संगीत] है उसी तरह से
33:15परमात्मा का ये परिचय या घाट है या नहीं उसके लिए भी कसौटी
33:22क्या है उसे पर कसकर हम देखेंगे की कौन सा मंत्र सही बैठता है
33:29वह कसौटी है परमात्मा वह है तो सर्व धर्म मान्य
33:38हुकुम परमात्मा कर सकते हैं अर्थात सारे धर्म के लोग इनको मानते हैं
33:46दूसरा परमात्मा वो होंगे तो सर्वोच्च सुप्रीम
33:52में थर्ड नीचे बड़ा कोई हो एन सके उनको हम कहेंगे
33:57परमात्मा तीसरा परमात्मा है जो परे अर्थात सबसे अलग
34:10माता के गर्भ से नहीं होता इनका अवतरण होता है और जन्म मारन के चक्कर में नहीं
34:17आती अर्थात सबसे अलग
34:23परमात्मा वो है उसे सर्वोच्च के हैं अर्थात पूरे सृष्टि के आदि मध्य अंत को
34:31जानने वाले हैं और सब कुछ जानने वाले हैं उसे कुछ चिंता नहीं है उनको हम कहेंगे
34:36आर्ट फरमाए और पांचवां परमात्मा में आनंद है
34:45अब इस कसौटी बगैर कस के देखते हैं कोई भी कर सकते हैं तो हम यही पाएंगे
34:53बाकी जो पहले का परिचय था वो कोई इस कसौटी करने गुजरेगी
34:59इस कसौटी में एक है जिस पर किसी को भ्रम हो सकता है वो क्या है की सर्व धर्म मैन
35:07इस बात को जब तक स्पष्ट नहीं होगा तो सुख नहीं माने
35:13तो सब धर्म मैन कैसे हैं परमात्मा इसका थोड़ा सा चीन
35:19तन तो हर धर्म के लोग जैसे [संगीत]
35:25क्राइस्ट अर्थात परमात्मा
35:33किशन धर्म के लोग मानते हैं ज्योति को परमात्मा दूसरा
35:39बौद्ध लोग भी जो टीका है ध्यान करते हैं जिनके जलाते हैं और उनका धान करते हैं
35:45अर्थात वो भी बुक को ही मानते हैं परमात्मा
35:51तीसरा मुस्लिम लोग मुस्लिम लोग भी जब हद करने जाते हैं
36:03जब तक उसका वो दीदार नहीं करती दर्शन नहीं करते उनका हर्ष नहीं अर्थात इनडायरेक्टली
36:12अर्थात बहुत शुरू से भी वो शिवलिंग को ही मानते हैं तभी तो उनका दर्शन करते हैं
36:19ये हो गया तो क्रिश्चियन हो गए
36:24और धर्म के लोग हैं बाकी गुरु नानक के भी कहते हैं लोग सिख
36:33लोग की एक उनका
36:40ही परमात्मा है बाकी जितने सारे नाम हैं
36:47जैसे विश्वनाथ पशुपति नाथ केदारनाथ
36:53ये सारे जो नाम है वो शिव परमात्मा के ही हैं
36:58की परमात्मा का यह परिचय
37:06अब एक गलती हमें कर दिया वह गलती क्या किया
37:14शंकर जी को और शिव जी को यह विमला दिया
37:19उसका कारण क्या है उसका कारण यह है की नर्स के अवतरण की विषय
37:25में मालूम है एन शंकर जी के अवतरण के विषय में मालूम है तो हमने दोनों के कर दिया
37:32चलिए झमेला ही खत्म दोनों एक लेकिन दोनों में महान अंतर कैसे अंतर है तो सबसे पहला
37:42अंतर नाम में शिवजी और दूसरा रूप में शिव जी
37:50ज्योतिर्लिंग स्वरूप हैं और शंकर जी रहा की धाम में एड्रेस
37:56शिवजी रहते हैं परमधाम और शंकर जी रहते हैं sukshmukh
38:02कम कर्तव्य में शिवजी कल्याणकारी और शंकर जी विनाश
38:08का अंतर हो गया सबसे बड़ा अंतर की शंकर की रचना है और श्री की उनके
38:17रचयिता को समुद्र क्या हो गया तो संबंध में भी अंतर हो गया तो नाम में
38:25अंतर रूप में अंतर कम में अंतर धाम में अंतर संबंध
38:33एक होने के लिए कुछ तो मिलना चाहिए जैसे दो जुड़वा बच्चे होते हैं
38:40होते तो हैं लेकिन उनका रूप रंग झा एल सब मैच करता है तो कोई कहता है की
38:46जुड़वा बच्चे यहां बैठे ही लेकर पैसा इससे धोखा है
38:52की संतान की और शिव जी गुरु अलग है क्योंकि शिव जी परमात्मा है और शंकर की भी
39:00होता है अब इसका प्रमाण का कोई मानने वाले हैं हर बात की कमाई की
39:07हम आपकी बात कैसे माने तो उसका प्रमाण यह पहला
39:13संकरण जी जहां भी तपस्या में दिखाई जाते हैं सामने शिव लिंग रखकर के
39:21शिव माने कल्याणकारी लिंग माना उनका चिन्ह अर्थात शिव परमात्मा के चिन्ह को आगे रखकर
39:28के उनका ध्यान करते हैं अगर ये दोनों एक होते उनका ध्यान करने
39:34चाहिए और ध्यान क्यों करते हैं की शंकर जी
39:39विनाशकारी विनाश के लिए बहुत शक्ति चाहिए और शक्ति कहां से मिलेगी जहां शक्ति के
39:46सागर हैं सुपर महात्मा उसे मिलेगी इसलिए उनको सामने रखकर के उनका ध्यान करते हैं
39:52और उसे शक्ति ग्रहण करते हैं ताकि वो अपने कर्तव्य को अच्छी तरह से निभा सके
39:58दूसरा प्रमाण शिवजी का जहां भी मंदिर है
40:05शिवालय कहा जाता है अर्थात शिव जी के रहने का स्थान
40:11किसी भी शिव जी के shankaralay नहीं कहा
40:16जाता अगर ये दोनों एक होते ही शिवालय कहते की कहीं सरकार वाले
40:23लेकिन ऐसा नहीं है इसमें विस्तृत होता है इस युग अलग है और शंकर जी अलग
40:32इन तथ्यों के आधार पर हमें पता चल गया की येतात परिचय परमात्मा
40:39का क्या हमारा समाप्त हो गया जब तक यथार्थ परिचय नहीं था
40:48हम लोग भटक रहे द जब घाट पर्चे हो गया तो
40:53भटकने की कोई बात ही नहीं है तो इसलिए कहा
41:00जिनका हम जिक्र करते हैं वो हमारी फिक्र करते हैं
41:06जिनका हम जिक्र करते हैं और नजर जाती है उनकी रहमतों पर
41:16ढाल नजर आता है ये जीवन खुशहाल नजर आता है तो
41:32फिर